रविवार, 25 जनवरी 2026

गणतंत्र दिवस पर एक पत्रकार की सोच — आखिर कैसा हो 2026 का आधुनिक भारत?

— शीबू खान
राष्ट्रीय महासचिव, साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन

गणतंत्र दिवस केवल तिरंगा फहराने या परेड देखने का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन का अवसर भी है कि हमारा भारत किस दिशा में बढ़ रहा है और हम 2026 के आधुनिक भारत को कैसा देखना चाहते हैं। एक पत्रकार होने के नाते, मेरी यह सोच सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की अपेक्षाओं, ज़मीनी सच्चाइयों और संविधान की मूल भावना से जुड़ी है।
आधुनिक भारत की नींव किसान की खुशहाली से मजबूत होगी। जब तक अन्नदाता सुरक्षित, सम्मानित और आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा रहेगा। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, सिंचाई व भंडारण की बेहतर सुविधाएं और महंगाई पर नियंत्रण—ये सब 2026 के भारत की प्राथमिकता होनी चाहिए।
देश का भविष्य नौजवानों के हाथों में है। शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना समय की मांग है। नौजवानों को सिर्फ डिग्रियां नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के साधन मिलें, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सकें।
महिलाओं को बराबरी का अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यवहार में दिखे। सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में समान अवसर—यही सशक्त भारत की पहचान होगी। वहीं नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक संस्कार और सुरक्षित वातावरण मिलना ही सच्चे राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। जिन बुजुर्गों ने इस देश को सींचा है, उनके लिए सुलभ और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। लोकतंत्र की मजबूती स्वतंत्र पत्रकारिता से ही संभव है। पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। कलमकारों को आय और रोजगार की स्थिरता मिले, ताकि वे बिना दबाव सच्चाई को सामने ला सकें। एक मजबूत मीडिया ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। 2026 का आधुनिक भारत वही होगा, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क या सस्ती हों। महंगाई पर नियंत्रण और आम आदमी की क्रयशक्ति बढ़ाना सरकार और समाज—दोनों की साझा जिम्मेदारी है। सबसे अहम है देश में अमन, चैन और शांति का माहौल। जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे को मजबूत करना ही गणतंत्र की सच्ची भावना है।
गणतंत्र दिवस पर मेरी यही कामना है कि 2026 का भारत केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि सामाजिक, नैतिक और लोकतांत्रिक रूप से भी सशक्त हो—जहां हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षित भविष्य मिले। यही एक पत्रकार की सोच है, यही आधुनिक भारत का सपना।

रविवार, 18 जनवरी 2026

AIMIM का उभार और विपक्ष की सबसे बड़ी रणनीतिक चूक, महाराष्ट्र के लोकल बॉडी चुनाव परिणाम और AIMIM से बदले सियासी समीकरणों का संकेत

शीबू खान

- महाराष्ट्र लोकल बॉडी चुनावों ने बदले सियासी संकेत, AIMIM अब हाशिये की नहीं रही पार्टी

- ‘भाजपा की बी टीम’ के आरोप से आगे निकली AIMIM, विपक्ष की रणनीतिक भूल हुई उजागर

- इंडी गठबंधन के लिए AIMIM अब विकल्प नहीं, राजनीतिक मजबूरी

- AIMIM–इंडी गठबंधन से भाजपा की त्रिकोणीय रणनीति को झटका संभव

- सीट शेयरिंग की चुनौती, लेकिन विपक्षी एकता को मिल सकती है नई धार

- समावेशन या नुकसान— इंडी गठबंधन के सामने सीधा सवाल


महाराष्ट्र के हालिया लोकल बॉडी चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को अब हाशिये की राजनीति में रखकर नहीं देखा जा सकता। पार्टी ने जमीनी स्तर पर अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए यह संदेश दिया है कि वह केवल विरोध की राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता भी रखती है। AIMIM प्रमुख बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी का यह स्पष्ट बयान कि उनकी पार्टी कभी भी NDA या भाजपा के साथ नहीं जाएगी, विपक्षी राजनीति के लिए एक अहम संकेत है। इसके बावजूद लंबे समय तक AIMIM को “भाजपा की बी टीम” कहकर इंडी गठबंधन या इंडिया ब्लॉक से दूर रखा गया। अब महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AIMIM को बाहर रखना वास्तव में विपक्ष की एक बड़ी रणनीतिक भूल थी?

इंडी गठबंधन की चूक और उसका खामियाजा

इंडी गठबंधन का उद्देश्य भाजपा के खिलाफ एक व्यापक, समावेशी मोर्चा खड़ा करना था। लेकिन AIMIM जैसी पार्टी, जिसकी अल्पसंख्यक वोट बैंक में मजबूत पकड़ है और जो शहरी निकायों से लेकर स्थानीय राजनीति तक प्रभाव रखती है, उसे नज़रअंदाज़ करना गठबंधन की कमजोरी बनकर उभरा। “भाजपा की बी टीम” का आरोप राजनीतिक रूप से सुविधाजनक तो था, लेकिन जमीनी सच्चाई से दूर साबित हुआ। इसका खामियाजा अब चुनावी परिणामों में दिखाई दे रहा है।

ओवैसी की राष्ट्रवादी छवि और विपक्ष की असहजता

दिलचस्प यह है कि कई राष्ट्रीय मुद्दों पर ओवैसी ने भाजपा से अलग होते हुए भी राष्ट्रहित में सरकार का समर्थन किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मुद्दों पर उनका भारत सरकार के साथ खड़ा होना यह दर्शाता है कि AIMIM केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करती। इसी तरह कांग्रेस के शशि थरूर सहित अन्य विपक्षी नेताओं का भी सरकार के पक्ष में खड़ा होना बताता है कि राष्ट्रहित की राजनीति दलगत सीमाओं से ऊपर जा सकती है। यह रुख AIMIM की छवि को और मजबूत करता है और “कट्टर विपक्ष” के आरोपों को कमजोर करता है।

भविष्य की मजबूरी बनती AIMIM

आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए अब यह साफ होता जा रहा है कि इंडी गठबंधन के लिए AIMIM को साथ लेना केवल विकल्प नहीं, बल्कि राजनीतिक मजबूरी बन सकता है। खासकर उन राज्यों और शहरी क्षेत्रों में, जहां AIMIM का प्रभाव निर्णायक साबित हो सकता है, वहां उसे अलग रखना भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने जैसा होगा।

राहुल गांधी और नेतृत्व की चुनौती

इंडी गठबंधन में राहुल गांधी की भूमिका भी इस संदर्भ में अहम हो जाती है। यदि गठबंधन को वास्तव में मजबूत करना है, तो पुराने राजनीतिक पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर नए समीकरणों पर विचार करना होगा। AIMIM को साथ लेने का फैसला केवल सीटों के गणित का नहीं, बल्कि भरोसे और समावेशन की राजनीति का प्रतीक होगा।

पश्चिम बंगाल में AIMIM की एंट्री से बढ़ेगी सियासी हलचल

पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में AIMIM के उतरने से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि AIMIM की मौजूदगी से कुछ सीटों पर मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है, जिससे तृणमूल कांग्रेस को नुकसान और भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी लगातार भाजपा के खिलाफ मुखर रहे हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में भाजपा की ध्रुवीकरण राजनीति को चुनौती भी मिल सकती है। भाजपा AIMIM को लेकर फिलहाल रणनीतिक चुप्पी बनाए हुए है। कुल मिलाकर AIMIM का असर सीट-दर-सीट अलग-अलग होगा। कहीं भाजपा को फायदा मिल सकता है, तो कहीं उसे नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। AIMIM की एंट्री ने बंगाल की चुनावी राजनीति को और रोचक बना दिया है।

पश्चिम बंगाल में AIMIM–इंडी गठबंधन का संभावित असर

यदि पश्चिम बंगाल में AIMIM इंडी गठबंधन का हिस्सा बनती है, तो इसका सीधा असर चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अल्पसंख्यक वोटों का बंटवारा रुकेगा और भाजपा को मिलने वाला अप्रत्यक्ष लाभ कम हो जाएगा। AIMIM के साथ आने से तृणमूल कांग्रेस और इंडी गठबंधन की सेक्युलर छवि मजबूत होगी, खासकर मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर बंगाल के इलाकों में। इससे भाजपा की त्रिकोणीय मुकाबले की रणनीति कमजोर पड़ सकती है। हालांकि सीट बंटवारे और स्थानीय राजनीति में कुछ चुनौतियां रहेंगी, लेकिन कुल मिलाकर AIMIM–इंडी गठबंधन विपक्षी एकता को मजबूत कर सकता है और बंगाल के चुनाव को अधिक सीधा व निर्णायक बना सकता है।




शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

पत्रकारों के हितों को लेकर सीजेए का सार्थक संवाद, एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने दिया पूर्ण सहयोग का आश्वासन

- मथुरा में एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह से सीजेए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवनीत रावत ने की मुलाकात

- पत्रकारों व कलमकारों के अधिकार और सुरक्षा पर हुई अहम चर्चा

- एमएलसी ने पत्रकारों को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया

मथुरा। विधान परिषद सदस्य (गोरखपुर–फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र) देवेन्द्र प्रताप सिंह से साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (सीजेए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवनीत रावत ने मथुरा में एक औपचारिक शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान कलमकारों, विशेष रूप से डिजिटल व फील्ड में कार्यरत पत्रकारों की समस्याओं, सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा हुई।
बताते चलें कि इस सार्थक भेंट के दौरान साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवनीत रावत ने संगठन की नीतियों, उद्देश्यों एवं राष्ट्रव्यापी अभियानों की जानकारी देते हुए कहा कि सीजेए पत्रकारों के हितों की रक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, निष्पक्ष पत्रकारिता और डिजिटल युग में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संघर्षरत है। संगठन पत्रकार सुरक्षा कानून, पत्रकारों के लिए सामाजिक व कानूनी संरक्षण तथा मीडिया को लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ बनाए रखने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में पत्रकारों के उत्पीड़न के मामलों में कानूनी सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रम, साइबर सुरक्षा जागरूकता तथा पत्रकारों की एकजुटता को मजबूत करने के लिए देशभर में अभियान चला रहा है। संगठन का स्पष्ट मानना है कि स्वतंत्र और सुरक्षित पत्रकारिता ही स्वस्थ लोकतंत्र की आधारशिला है। इस सार्थक संवाद के दौरान एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने पत्रकारों की भूमिका को लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में रेखांकित करते हुए साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आश्वस्त किया कि पत्रकारों के हित, सुरक्षा और सम्मान से जुड़े हर सकारात्मक प्रयास में वे पूर्ण सहयोग देंगे तथा आवश्यक स्तर पर विषयों को उठाने में पीछे नहीं हटेंगे। यह मुलाकात पत्रकार हितों को लेकर एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में पत्रकारों की समस्याओं के समाधान और नीतिगत सहयोग की उम्मीद को बल मिला है।

रविवार, 11 जनवरी 2026

साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन का राष्ट्रव्यापी सदस्यता अभियान शुरू

- राष्ट्रीय संरक्षक पीयूष त्रिपाठी ने कानपुर में किया अभियान का शुभारंभ

- सदस्यता अभियान के बाद मीडिया कर्मियों के अधिकारों की लड़ाई होगी तेज – शीबू खान, राष्ट्रीय महासचिव 

- फतेहपुर, कानपुर, प्रयागराज व कौशांबी में सघन अभियान, दर्जनों कलमकार एवं पत्रकार संगठन से जुड़े

फतेहपुर। साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर रविवार से संगठन का राष्ट्रव्यापी सदस्यता अभियान शुरू हो गया। अभियान की औपचारिक शुरुआत कानपुर से की गई, जहां संगठन के राष्ट्रीय संरक्षक पीयूष त्रिपाठी ने सदस्यता अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान भी उपस्थित रहे।
कानपुर में जिला सचिव आदित्य शर्मा के नेतृत्व में शीर्ष पदाधिकारियों की मौजूदगी में दर्जनों पत्रकारों को संगठन की सदस्यता दिलाई गई। वहीं फतेहपुर में जिला अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह एवं जिला सचिव धीर सिंह यादव की मौजूदगी में सघन सदस्यता अभियान चलाया गया, जिसमें कई पत्रकारों एवं कलमकारों ने सदस्यता फॉर्म भरकर संगठन से जुड़ने का संकल्प लिया। वहीं उत्तर प्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी ने भी सदस्यता अभियान को गति देते हुए आधा दर्जन से अधिक नए सदस्यों को संगठन से जोड़ा। फतेहपुर जनपद के ऐरायां ब्लॉक महासचिव मेराज अहमद ने भी अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाई। इसी क्रम में प्रयागराज में प्रदेश उपाध्यक्ष राजुल शर्मा की निगरानी में जिला इकाई के जिलाध्यक्ष जाबिर अली एवं उनकी टीम द्वारा गहन सदस्यता अभियान चलाते हुए बड़ी संख्या में पत्रकारों को संगठन परिवार का हिस्सा बनाया गया। वहीं कौशांबी में कार्यवाहक जिला अध्यक्ष राजेश साहू एवं जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद अमजद के नेतृत्व में कई नए सदस्यों को जोड़ा गया। सदस्यता अभियान का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष शाश्वत तिवारी ने सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के प्रति समर्पित भाव से अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। संगठन की संस्थापिका पुष्पा पांडेया ने भी पदाधिकारियों, सदस्यों एवं शुभचिंतकों से सदस्यता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने और देश में मीडिया को संवैधानिक दर्जा दिलाने की लड़ाई को मजबूत करने का आह्वान किया। वहीं राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान ने बताया कि यह सदस्यता अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है, जिसके बाद मीडिया और मीडिया कर्मियों के अधिकारों की रक्षा एवं उनके संवैधानिक हितों के लिए व्यापक स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।

गुरुवार, 1 जनवरी 2026

साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन का सदस्यता अभियान शुरू

फतेहपुर। पत्रकारों एवं कलमकारों के शीर्ष संगठन साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (सीजए) के राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर फतेहपुर जनपद में सदस्यता अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य पत्रकारों को संगठित कर उनके अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करना है।
संगठन की संस्थापिका पुष्पा पांडेया, संरक्षक पीयूष त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यक्ष शाश्वत तिवारी, राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान एवं उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शहंशाह आब्दी के निर्देशन में फतेहपुर जिलाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह द्वारा बिंदकी तहसील के औंग क्षेत्र से सदस्यता अभियान चलाया गया। गुरुवार को नए साल के पहले दिन राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान की मौजूदगी में जिलाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह ने जिला सचिव धीर सिंह यादव के साथ मिलकर शैलेश कुमार सिंह सहित कई अन्य पत्रकार एवं विभिन्न विधा से जुड़े कलमकार साथियों को संगठन की सदस्यता दिलाई। इस अवसर पर संगठन को और अधिक मजबूत बनाने, पत्रकार हितों की रक्षा तथा निष्पक्ष पत्रकारिता को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि सदस्यता अभियान आगे भी पूरे जनपद में चलाया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक पत्रकार साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन संगठन से जुड़ सकेंगे।

सीजेए के राष्ट्रीय महासचिव शीबू खान का सादगी से मनाया गया जन्मदिन

- पत्रकारों के हितों की लड़ाई को लेकर दिया गया एकजुटता का संदेश - मीडिया फायर ब्रांड लीडर शीबू खान ने सभी का जताया आभार   फतेहपुर। साइबर जर...